अज़ान का हिन्दी में क्या मतलब होता है , अज़ान में क्या बोला जाता है – हिन्दू मुस्लिम सब देखे

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दोस्तों अज़ान तो आपने सुना ही होगा . माइक में अज़ान को लेकर कई बार विवाद भी खड़े हो चुके है . मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थल मस्जिद से अज़ान दी जाती है . एक दिन में 5 वक्त नमाज़ होती है . पांचो वक्त कि नमाज़ों से ठीक पहले अज़ान होती है मतलब हर वक्त कि नमाज़ से ठीक पहले मस्जिद से अज़ान दी जाती है . मुस्लिम गुरुओ ने बताया कि अज़ान लोगो को बुलाने के लिए या पुकारने के लिए दी जाती है . दोस्तों आज हम आपको अज़ान का मतलब बतायेंगे मतलब अज़ान में जो कुछ कहा जाता है उसका हिंदी में क्या मतलब है .





दोस्तों सोशल मीडिया द्वारा अक्सर अज़ान का गलत मतलब फ़ैलाने कि कोशिश कि जाती है . कई वेबसाईट पर अज़ान का सही मतलब भी होता है . दोस्तों आप आप नहीं जानते अज़ान का मतलब तो आयी जानते है .
अज़ान देने वाला शख्स सबसे पहले “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ” . दोबारा फिर इन्ही लफ्जों को एक बार फिर कहता है “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ” .

फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं ” फिर इन्ही लफ्जों को एक बार और दोहराया जाता है “अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं ” .




फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के आखरी पैगम्बर/रसूल हैं ” फिर इन्ही लफ्जों को एक बार और दोहराया जाता है अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के आखरी पैगम्बर/रसूल हैं ”

फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “ह्या ‘अलास्सलाह, ह्या ‘अलास्सलाह” जिसका मतलब ” आओ नमाज़ की ओर ” .
फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “हया ‘अलल फलाह, हया ‘अलल फलाह” जिसका मतलब ” आओ सफलता की ओर “.




फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ”
फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब है ” अल्लाह के सिवा कोई इबादत के काबिल नहीं ”

आपको बतादे 4 वक्त कि नमाज़ कि यही अज़ान होती है लेकिन सुबह कि पहली नमाज़ मतलब जो सुबह 5 बजे या 6 बजे के पास होती है उसमे दो लाइन और जोड़ दी जाती है . सुबह कि नमाज़ मतलब फज्र कि नमाज़ कि अज़ान कुछ यूँ हैं …




अज़ान देने वाला शख्स सबसे पहले “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ” . दोबारा फिर इन्ही लफ्जों को एक बार फिर कहता है “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ” .

फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं ” फिर इन्ही लफ्जों को एक बार और दोहराया जाता है “अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं ” .




फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के आखरी पैगम्बर/रसूल हैं ” फिर इन्ही लफ्जों को एक बार और दोहराया जाता है अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” जिसका मतलब ” मैं दावा देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. अल्लाह के आखरी पैगम्बर/रसूल हैं ”

फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “ह्या ‘अलास्सलाह, ह्या ‘अलास्सलाह” जिसका मतलब ” आओ नमाज़ की ओर ” .
फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “हया ‘अलल फलाह, हया ‘अलल फलाह” जिसका मतलब ” आओ सफलता की ओर “.




फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम” जिसका मतलब ” नमाज़ सोने से बहतर है* ” .
फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम” जिसका मतलब ” नमाज़ सोने से बहतर है* “.

फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर” जिसका मतलब है ” अल्लाह सबसे बड़ा है ”
फिर अज़ान देने वाला शख्स ये कहता है “ला-इलाहा इल्लल्लाह” जिसका मतलब है ” अल्लाह के सिवा कोई इबादत के काबिल नहीं ”

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